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PFBR क्रिटिकैलिटी: भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम की 5 अहम बातें जो UPSC 2026 में पूछी जाएंगी | Riyasat IAS Mentorship

PFBR क्रिटिकैलिटी — चर्चा में क्यों?

The Prototype Fast Breeder Reactor (PFBR) at Kalpakkam has achieved criticality – the start of the second stage of Indias three-stage nuclear programme. This makes India the second country after Russia to operate an FBR. A top-priority GS Paper 3 topic covered in depth at Riyasat IAS Mentorships UPSC Mentorship Program.

PFBR और भारतीय परमाणु कार्यक्रम — UPSC Prelims के लिए मुख्य तथ्य

शब्द/तथ्यविवरण
PFBRPrototype Fast Breeder Reactor — कल्पक्कम, तमिलनाडु
क्रिटिकैलिटीश्रृंखला अभिक्रिया स्वयं को बनाए रखे — व्यावसायिक उत्पादन का पहला कदम
PFBR की स्थितिरूस के बाद FBR चलाने वाला दूसरा देश बनेगा भारत
FBR ईंधनPu-239 + U-238 (MOX) — उपयोग से अधिक ईंधन उत्पादन
PHWR ईंधनप्राकृतिक यूरेनियम (0.7% U-235 + 99.3% U-238)
FBR कूलेंटतरल सोडियम (vs PHWR में भारी पानी)
लागतRs.3,500 Cr से Rs.6,800 Cr; 2022 लक्ष्य मिस
वैश्विक असफलताएंजापान मोनजू (1995 सोडियम लीक), फ्रांस सुपरफेनिक्स (बंद)

5 अहम बातें — PFBR और भारत का तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम

1. क्रिटिकैलिटी क्या है?

क्रिटिकैलिटी वह अवस्था है जब रिएक्टर में श्रृंखला अभिक्रिया खुद को बनाए रख लेती है — एक विखंडन से न्यूट्रॉन कम से कम एक और विखंडन शुरू करते हैं। यह व्यावसायिक बिजली उत्पादन का पहला कदम है, अंतिम नहीं।

2. FBR और PHWR में अंतर

पहलूPHWRFBR (PFBR)
ईंधनप्राकृतिक यूरेनियमPu-239 + U-238
न्यूट्रॉनधीमे (मॉडरेटर से)फास्ट (बिना मॉडरेटर)
कूलेंटभारी पानीतरल सोडियम
ईंधन दक्षता~1%10%+
विशेषताPu-239 उत्पन्न करता हैउपयोग से अधिक ईंधन बनाता है

3. होमी भाभा का तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम

India has limited uranium but abundant thorium (~25% of world reserves). Homi Bhabha designed the three-stage programme in the 1950s – a direct UPSC question. Enrol in Secure Prelims Program 2026 to master it:

  • पहला चरण: PHWR — प्राकृतिक यूरेनियम से बिजली + Pu-239 + depleted U-238 [पूर्ण]
  • दूसरा चरण: FBR — Pu-239 + U-238 से बिजली + अधिक Pu-239. PFBR इसी का प्रोटोटाइप [अभी यहीं – शुरू]
  • तीसरा चरण: Th-232 से U-233 — थोरियम रिएक्टर AHWR [जारी]

4. PFBR की प्रमुख चुनौतियां

  • तरल सोडियम कूलेंट — हवा/पानी से तीव्र प्रतिक्रिया, आग और रिसाव का जोखिम
  • लागत: Rs.3,500 Cr से Rs.6,800 Cr; बार-बार समय-सीमा विस्तार
  • ईंधन पुनः-प्रसंस्करण के लिए अलग इंफ्रास्ट्रक्चर और AERB नियामक अनुमोदन जरूरी
  • उच्च परिचालन जटिलता और जन-विरोध

5. आगे की राह

  • कम पावर पर परीक्षण -> क्षमता वृद्धि -> AERB व्यावसायिक मंजूरी
  • कल्पक्कम में 4 EFBR (500 MW प्रत्येक) निर्माण
  • थोरियम-आधारित AHWR पर तेजी; 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता लक्ष्य
  • SMR और Nuclear Energy Mission (Rs.20,000 Cr निवेश)
  • DAE: पारदर्शिता बढ़ाएं, R&D में निजी भागीदारी लाएं, जन-जागरूकता

UPSC प्रासंगिकता — PFBR क्रिटिकैलिटी

Prelims के लिए:

  • PFBR — पूर्ण रूप, स्थान (कल्पक्कम, तमिलनाडु), क्रिटिकैलिटी का अर्थ
  • तीन-चरणीय कार्यक्रम — होमी भाभा, तीनों चरणों का क्रम
  • FBR vs PHWR — ईंधन, कूलेंट, दक्षता का अंतर
  • AERB — Atomic Energy Regulatory Board
  • भारत में थोरियम भंडार — विश्व का लगभग 25%

Mains के लिए (GS Paper 3):

  • PFBR क्रिटिकैलिटी — तकनीकी, रणनीतिक और चुनौतियों के आयाम
  • परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भरता — भारत का रोडमैप
  • ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम — राष्ट्रीय महत्व
  • SMR और परमाणु ऊर्जा का भविष्य — नीतिगत विश्लेषण

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अभ्यास प्रश्न (Mains — 250 शब्द):

कल्पक्कम में PFBR की क्रिटिकैलिटी प्राप्ति भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण का प्रारंभ दर्शाती है। इस उपलब्धि के तकनीकी, रणनीतिक एवं चुनौतियों के आयामों की समीक्षा कीजिए। (250 शब्दों में)

निष्कर्ष

PFBR criticality is a historic step towards Indias energy self-reliance and the foundation of Stage III thorium reactors. For complete command over S&T topics, join Riyasat IAS Mentorship. आज ही Admission लें.

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बाहरी संदर्भ:

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